
वृष राशि की आकृति बेल जेसी तथा यहसम स्त्री स्थिर एवं पृथ्वी तत्व राशि हे स्वभाव सोभ्या दक्षिण दिशा का मालिक वात प्राकती वेश्या जाती रंग दहि जेसा सफ़ेद तथा रात्री वाले हे यह सरल भूमि मे विचरण करने वाले एवं प्रभाव सर्द शुस्क हे इसका स्वामी शुक्र व चन्द्र इसमे उच्च का होता हे !
कद औसत ललाट चोड़ा गर्दन सुघथित कंधे चोड़े एवं मोटे आंखे चमकदार बाल काले तथा कई बाल आगे से गुंगराले होते हे कई बार मुह पतला शरीर भारी भरकम होता हे
घमंडी अभिमानी हठधर्मी गूस्सेल भड़क पड़ने वाला पेटु अपने आप मे मस्त खाने पीने का शोकीन तथा अपने ही धुन मे मस्त रहना इसके विशेष गुण हे
वृष राशि स्थिर हे एवं पृथ्वी तत्व राशि हे इसलिए इस मे सहन शक्ति बहुत होती हे ये परिश्रमी होते हे तथा लंबे समय तक कार्यो मे लगे रहते हे यदि इनको अधिक छेड़ा जाए तो क्रोधित हो जाते हे ओर यह किया धरा बिगाड़ देते हे छेड़ने वाले को भी हानी व कठिनाई मे दाल देते हे ओर यह जल्दी काबू मे नहीं आते हे तथा देर बाद ही शांत होते हे एवं अवसर की ताक मे रहते हे ओर ये जिद्दी अड़ियल होते हे यदि इन्हे प्रेम से कोई काम दिया जाए तो यह खुद करते हे तथा ये करवाने वाले को भी शाबाशी प्राप्त करते हे भोतिक जगत मे विचरण करके ये प्रसन्न होते हे किसी बात को वर्षो तक मन मे रखते हे भूलते नहीं हे ओर ये अपने मन की बात किसी को नही बताते हे जब तक की इंनका उद्देश्य पूरा न हो जाए ओर ये दिया गया अपना लक्ष्य पूर्ण करना अपना कर्तव्य समजते हे इन्हे जीवन मे काफी काम स्वयं करना पड़ता हे हे गाने बाजने के प्रेमी विलासी एवं कार्य व्याहवर मे खुशाल होते हे सांसरिक सुखो तथा धन जमाने मे काफी रुचि लेते हे धन खर्च करने मे साधारण कंजूस ही होते हे
निचला भाग यदि शरीर मान लिया जाए तो ऊपर सिंग प्रतीत होते हे यदि इनको अधिक छेड़ा जाए तो पूरी शक्ति के साथ सिंग अडा देते हे यदि आगे से भी पूरी शक्ति वाला अड़ जाए तो सिंग तुड़वा लेते हे ओर फिर पुंछ उठाकर भाग जाते हे क्योकि ये बात को भूलते नही हे तथा अवसर देखकर फिर सिंग अडा लेते हे !
पढ़ाई ये लग्न एवं मेहनत के साथ करते हे यदि ग्रहो की स्थिति ठीक हो तो अपनी लग्न व मेहनत से सफल होते हे
ये अकेले कम ही होते हे इनके भाई बहन होते हे यदि भाइयो की जोड़ी हो तो माता पिता को इन पर बड़ा गर्व होता हे तथा माता पिता के आदर व सम्मान व धन को बढाते हे प्रेम संबंध एवं मित्रता स्थायी होती हे मित्र तथा परिजन का स्नेह प्रेम इन्हे मिलता हे इस प्रकार समाज मे मान मर्यादा आची होती हे यह अच्छे पति पत्नी होते हे ग्रहस्थ जीवन आनंदमय होता हे अपने जन्म स्थान के साथ इन्कस खूब लगाव होता हे पत्नी पति मे खूब पटती हे !
मेरे अनुभव मे प्राय आया हे यदि शुक्र तीसरे गृह मे राहू के साथ हो तो पत्नी के अतिरिक्त अन्य स्त्री के साथ सहज ही स्थायी संबंध बन जाते हे यदि शुक्र चोथे गृह मे चन्द्र के साथ बैठा हो तो ये दोनों स्त्री गृह हे ऐसे जातक के गृह मे 2 स्त्रीया होगी विवाह साधारणतया 24 25 वर्ष तक हो जाता हे
धन कमाने आदि के लिए यात्राए काफी करनी पड़ती हे यात्राओ मे कई दंगा रोग एवं दुख जेलने पड़ते हे
क्योकि शुक्र इस राशि का मालिक हे तथा यह स्थिर राशि हे कृषि एवं हाथो से काम करने की विशेष रुचि होती हे यदि ग्रहो की स्थिति प्रतिकूल हो तो ये आलसी हो जाते हे एवं आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ता हे !
आयु के 15वे 18वे 21वे 22वे 24वे 25वे 28वे 29वे 31वे 33वे 35वे 36वे 39वे 41वे 42वे 45वे वर्ष विशेष महत्व तथा विवाह पढ़ाई विवाह नौकरी संतान आदि के लिए महत्वपूर्ण रहते हे !
ये खाने पीने के बहुत शोकीन होते हे तथा कई बार अधिक खा जाते हे आहार की अनियमितता एवं अधिक परिश्रम करने के कारण अस्वस्थ हो जाते हे पानी से डरते हे नेत्र रोग गले कान नाक आदि के रोग फेफड़ो के ऊपर के भाग के रोग चर्म मासपेशीया अपच पेट गेस भी हो जाती हे कई दफा मूत्र रुक रुक कर आने लगता हे अंको पर खारिस भी हो जाती हे !
शुक्रवार का दिन दहि रंग सफेद तथा 6 की संख्या इनके लिए शुभ होती हे 3 व 9 की संख्या तथा हल्का पीला रंग भी अनुकूल होता हे !
हीरा अलुमिनियम अथवा चाँदी की अंगूठी मे जो 2.5 रत्ती से ऊपर कनिष्ठा अंगुली मे धारण करना शुभ फलदायक हे शुक्रवार को धरण करना चाहिये पन्ना फिरोज भी शुभ हे