
राहू, केतू के विशेष उपय l
विशेष उपाय इस लिए दिये जा रहे है की अनुभव मे आया है की जिन लोगो की जन्म कुंडली मे राहू केतू कर्क मकर मे है या केतू कर्क ओर राहू मकर मे है तो उनको मानसिक, शारीरिक, परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है क्योकि इस समय गोचर मे राहू कर्क राशि मे ओर केतू मकर राशि से भ्रमण कर रहा है अत जिनकी भी जन्म कुंडली मे राहू केतू कर्क ऑर मकर मे स्थित है या उनकी राहू केतू की दशा अंतरदशा दशा चल रही हो वो ये उपाय करके लाभान्वित हो सकते है ऑर परेशानियों से निजात पा सकते है
खास उपाय
1. यहां बताए जा रहे सारे उपाय राहु केतु के लिए समान है। सन्ध्या समय हनुमान चालीसा, संकटमोचन अष्टक, श्रीराम स्तुति और बजरंगबाण का पाठ करे। सुबह शाम दोनों समय मिलने पर, दोपहर और आधी रात , ये चार संध्याएं है। सुविधानुसार समय चुन ले। एक से अधिक सन्ध्याओ में जप करना अधिक लाभकारी है।
2. बुधवार, शनिवार को रामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ करे। पाठ समाप्ति तक दीपक और अगरबत्ती जलती रहे।
3. हर अमावस्या और पूर्णिमा को जल भरा लोटा अपने बाए हाथ से छूते हुए इन मन्त्रो से शिवलिंग या शालिग्राम के सामने रोली सफेद तिल फूल आदि से पूजा करे। भुने तिल, साबुत उड़द और चावल की घी डली खिचड़ी का भोग लगाएं। पानी वाला एक नारियल फल की जगह अर्पित करें। पूजा के बाद नारियल को तोड़कर बाटे और खिचड़ी और चढ़ी सामग्री को किसी गाय, सांड या पक्षियों को खिला दे। अपने खाने में भोग के अलावा बची खिचड़ी का भी सेवन करे। यदि खिचड़ी न बनाना चाहे तो एक दोने में दही में कुछ बूंदे गर्म देसी घी और शहद की गिराकर भोग लगा सकते है। ध्यान रहे , जो भोग हो उसका न चढ़ाया हुआ भाग खुद भी परिवार सहित ले। नमस्कार के ये 41 मन्त्र क्रमशः बोलते हुए सफेद तिल या रोली या फूल 41 बार चढ़ाए-
1. ॐ नारायणाय नमः।
2. ॐ सहस्त्राक्षाय नमः।
3. ॐ पद्यनाभय नमः।
4. ॐ पुरातनाय नमः।
5. ॐ हर्षीकेशय नमः।
6. ॐ गोविन्दाय नमः।
7. ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः।
8. ॐ अनन्ताय नमः।
9. ॐ अजाय नमः
10. ॐ अव्ययाय नमः।
11. ॐ केशवाय नमः।
12. ॐ वासुदेवाय नमः।
13. ॐ जगदयोनय नमः।
14. ॐ भानुमन्ताय नमः।
15. ॐ आतीन्द्रियाय नमः।
16. ॐ दामोदराय नमः।
17. ॐ शंखचक्रधराय नमः।
18. ॐ छद्यरूपिने नमः।
19. ॐ अधोक्षजाय नमः।
20. ॐ वाराहाय नमः।
21. ॐ वामनाय नमः।
22. ॐ विष्णवे नमः।
23. ॐ नारसिंहाय नमः।
24. ॐ जनार्दनाय नमः।
25. ॐ माधवाय नमः।
26. ॐ पुरुषाय नमः।
27. ॐ पुष्कराय नमः।
28. ॐ पुण्याय नमः।
29. ॐ क्षेत्रबीजाय नमः।
30. ॐ जगतप्तये नमः।
31. ॐ लोकनाथाय नमः।
32. ॐ सहस्त्रशीर्षय नमः।
33. ॐ देवेशाय नमः।
34. ॐ व्यक्ताव्यक्ताय नमः।
35. ॐ सनातनाय नमः।
36. ॐ महायोगाय नमः।
37. ॐ भुतात्मने नमः।
38. ॐ महात्मने नमः।
39. ॐ यज्ञयोनये नमः।
40. ॐ अयोनिजाय नमः।
41. ॐ विश्वरूपीने नमः।
4. भैरवजी के इस मन्त्र का दस बार रोजाना जप करे-
ॐ ही बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ही ॐ।
महीने में एक दो बार भैरवजी के सामने दीपदान करे और दूध का पैकेट रख दे। फिर वही खड़े रहकर इसी मन्त्र को दस बार जप ले।
उक्त जानकारी सुचना मात्र है, किसी भी निष्कर्ष पर पहुचने से पहले कुंडली के और भी ग्रहो की स्तिथि, बलाबल को भी ध्यान में रख कर तथा किसी योग्य ज्योतिर्विद से परामर्श कर ही किसी भी निर्णय पर पहुचना चाहिए |